पाकिस्तान मोटरवे गैंगरेप केस: फ्रांसीसी महिला से दरिंदगी करने वाले दो दोषियों की फांसी की सजा बरकरार

दिल्ली: पाकिस्तान के बहुचर्चित मोटरवे गैंगरेप मामले में लाहौर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने दोषी आबिद अली और शफकत अली की अपील खारिज कर दी है। यह मामला सितंबर 2020 में सामने आया था, जिसने न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।

घटना सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर हुई थी। फ्रांसीसी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ यात्रा कर रही थी। रास्ते में उनकी कार का पेट्रोल खत्म हो गया, जिसके बाद वह सड़क किनारे वाहन में बैठकर मदद का इंतजार करने लगीं। इसी दौरान दो आरोपियों ने मौके का फायदा उठाया।

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने पहले कार का शीशा तोड़ा, फिर महिला को जबरन बाहर खींच लिया। इसके बाद बच्चों के सामने ही बंदूक की नोक पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। वारदात के दौरान आरोपियों ने महिला से नकदी, गहने और बैंक कार्ड भी लूट लिए थे।

घटना के बाद पूरे पाकिस्तान में भारी आक्रोश फैल गया था। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। मामले की जांच तेज करते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और अदालत में चार्जशीट दाखिल की।

मार्च 2021 में एंटी टेररिज्म कोर्ट ने आबिद अली और शफकत अली को गैंगरेप, अपहरण, लूट और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों दोषियों ने लाहौर हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है।

इस फैसले को पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है।

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